सीरखड़ी तूं म्हारी भायली है, सियाळे री सहेली है
लपट-झपट कर थारै सागे, सारी रात बितावौं
खाटा-मीठा सुपना देखों, किणने बात बतावों
मूतण री हाजत हो जावै, थर-थर कांपे काया
पाछा आय थांसूं मिलों तो, पाछा हो जावों न्याया
काती सूं फागण तक थारो, साथ घणो है आछो
निर्मोही आदत है म्हारी, घिर नहीं जोउं पाछौ
तो ही तूं नहीं होवै रीसोणी, मिले प्रेम सूं पाछी
माइतों रा श्राद बीतियों पाछी आवै काती
रजाई ने इंगित करती मायड़ भाषा री आ कविता वैद्यराज सत्यनारायण जी व्यास सा म्हनै सुणाई। बै ब्लॉग और साइट रा मतलब तो को समझे नीं लेकिन म्हनै बियों कयो चावै जठे छाप। मायड़ में सहज सृजन री ई प्रवृत्ति रे साथै ब्लॉग पर आपांरी मायड़ री सेवा रे रंग चढ़ावणे रो प्रयास शुरू कर चुकियो हूं, बाकी लोगां ने भी घणे मान सूं न्यौतो दे रयो हूं। आवै जिका सृजनकार सिर माथै पर। एक बार सोची कि ई कविता रो हिन्दी अर्थ भी दूं। फेर सोचियो कि दूसरे लोगां ने पढ़ण दूं। कोई कैसी तो हिन्दी में भी अनुवाद लिख देसों। पण खांटी मारवाड़ी रो जिको आनन्द है बो अनुवाद में कोनी....
कोई भूल चूक होवे तो माफी चाउं
विद्वजणों री सलाह री उडीक रैसी
Sunday, January 18, 2009
Wednesday, January 14, 2009
आपौंरी भाषा आपौंरा लोग
लारे एक गोष्ठी हुई बीकानेर में, शबदा तणी साख, बीयरे मांय मायड़ भाषा रा कई कवि और साहित्कार भेळा हुआ। आ देखर राजी होयो कि आज जद लोग आपरी भाषा ने छोड अर आपरे टाबरों ने हिन्दी सिखावण लाग रया है जद कई लोग इसा भी है जिका लगातार राजस्थानी री सेवा ही को कर रया नी बल्कि बीनै बढ़ावौ देण खातर देस विदेस में कार्यक्रम भी कर रया है। आ बात ठीक है कि हाल राजस्थानी री खुद री कोई लिपी का नी लेकिन भाषा तो है। जिकैने आपरी भावना व्यक्त करनी है बीरे वास्ते मातृभाषा सूं बढकर कोई दूसरी भाषा का हो सके नी।
अबै म्हारो इमैं कांई काम। ना हूं राजस्थानी रो साहित्यकार, ना कवि ना ही राजस्थानी रा नाटक करूं। सई कैउं तो घर में मारवाड़ी बोलनी और रिपोर्टिंग रै दौरान अठैरे लोगों सूं बातचीत में मारवाड़ी आवै। ना तो हूं घणे पढि़यो लिखियो हूं ना म्हनै इरो भैम। फेर तो बस बात इत्ती है कि राजस्थानी नौम सूं एक कम्युनिटी ब्लॉग शुरू कर रयो हूं। इमै बै लोग आमंत्रित है जिका इंटरनेट रै इ माध्यम ता इ भाषा री सेवा कर सके। साथै ही म्हनै ओ लागे कि हाल इंटरनेट और कम्प्यूटर ता सृजन करने वाळों री दूरी है। बीनै भी इ माध्यम ता पाटने रो प्रयास करसूं। जिका लोग इ ब्लॉग में लिखणो तो चावै लेकिन बियोने आ ठा कायनी कि कौंकर लिखीज सी। बिये लोगों ने हूं हरेक टैम उपलब्ध हूं। अगली पोस्ट तक बस इत्तो ईज...
सिद्धार्थ जोशी
09413156400
ईमेल आईडी- imjoshig@gmail.com
अबै म्हारो इमैं कांई काम। ना हूं राजस्थानी रो साहित्यकार, ना कवि ना ही राजस्थानी रा नाटक करूं। सई कैउं तो घर में मारवाड़ी बोलनी और रिपोर्टिंग रै दौरान अठैरे लोगों सूं बातचीत में मारवाड़ी आवै। ना तो हूं घणे पढि़यो लिखियो हूं ना म्हनै इरो भैम। फेर तो बस बात इत्ती है कि राजस्थानी नौम सूं एक कम्युनिटी ब्लॉग शुरू कर रयो हूं। इमै बै लोग आमंत्रित है जिका इंटरनेट रै इ माध्यम ता इ भाषा री सेवा कर सके। साथै ही म्हनै ओ लागे कि हाल इंटरनेट और कम्प्यूटर ता सृजन करने वाळों री दूरी है। बीनै भी इ माध्यम ता पाटने रो प्रयास करसूं। जिका लोग इ ब्लॉग में लिखणो तो चावै लेकिन बियोने आ ठा कायनी कि कौंकर लिखीज सी। बिये लोगों ने हूं हरेक टैम उपलब्ध हूं। अगली पोस्ट तक बस इत्तो ईज...
सिद्धार्थ जोशी
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